Jan 31, 2018

बरेली देश का 13वां सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण वाला शहर

शहर की आबोहवा इस कदर जहरीली होती जा रही है कि अगर हम आज नहीं संभले तो आने वाले दिनों में खतरनाक हालातों को सामना करना पड़ सकता है। हालात इसलिए चिंताजनक हैं, क्योंकि हमारा शहर वायु प्रदूषण के मामले में देश में 13वें नंबर पर आ गया है। प्रदेश में बरेली चौथे नंबर पर है जहां की आबोहवा सबसे ज्यादा जहरीली होती जा रही है। यह खुलासा हुआ है ग्रीनपीस इंडिया की रिपोर्ट में जिसमें देश 280 शहरों को शामिल किया गया था। संस्था ने सोमवार को अपनी दूसरी रिपोर्ट जारी की। 
रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के मामले में बरेली देश के 280 शहरों में 13वें नंबर पर है। उत्तर प्रदेश के 22 शहरों में बरेली चौथे नंबर पर है। इस रिपोर्ट में 280 शहरों के वर्ष 2015 और 2016 के साल भर का औसत पार्टीकुलेट मेटर (पीएम10) के आंकड़े जुटाए। बरेली का औसत पीएम 10 स्तर 226 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। 280 शहरों में 7वें स्थान पर गाजियाबाद, 17वें स्थान पर कानपुर और 18वें स्थान पर लखनऊ है। शीर्ष 30 में हापुड़, फिरोजाबाद ,आगरा, नोएडा, इलाहाबाद , मथुरा जैसे प्रमुख शहर हैं। सर्वे के लि डाटा राष्ट्रीय वायु निगरानी कार्यक्रम, राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिले आंकड़े और विभिन्न राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वार्र्षिक रिपोर्ट का विश्लेषण करके तैयार किए गए। रिपोर्ट के अनुसार देश के 280 शहर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वायु गुणवत्ता मानक बीस माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कई गुना ज्यादा हैं। इतना ही नहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी वायु गुणवत्ता मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी ज्यादा है।

औसत पीएम10 ( माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) की मात्रा के अनुसार में शहरों की स्थिति
 वाराणसीए गाजियाबादए हापुड़ए बरेलीए फिरोजाबादए कानुपरए लखनऊए आगराए नोएडाए मोरादाबादए इलाहाबादए गजरौली और मथुरा में क्त्रस्मश: 236
वाराणसी 236, गाजियाबाद 236, हापुड़ 235, बरेली 226, फिरोजाबाद 223, कानपुर 217, लखनऊ 211, आगरा 197, नोएडा 195, मुरादाबाद 195, इलाहाबाद 192, गजरौला 191, मथुरा 172 


बाकी शहरों की स्थिति भी ठीक नहीं 
ग्रीनपीस के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया के अनुसार उत्तर प्रदेश के ऐेसे 22 जिलों को शामिल किया गया जहां वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र बने हैं। जबकि 53 जिलों में गुणवत्ता मापने के लिए कोई यंत्र तक नहीं लगा है। सबसे ज्यादा जनसंख्या जो बिना डाटा वाले इलाके में रह रहे हैं वो उत्तर प्रदेश में करीब 13 करोड़ 30 लाख है। यहां वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र बनाने की जरूरत है। 280 शहरों में 63 करोड़ लोगों को कवर किया जिसमें 55 करोड़ लोग पीएम10 के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक के औसतन अधिक पीएम10 स्तर पर रह रहे हैं। इसमें 4.7 करोड़ बच्चे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि संस्था प्रदूषण नियंत्रण के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रही है।

रिपोर्ट में दिए गए सुझाव
-पूरे देश में वायु गुणवत्ता की निगरानी हो।
-वायु गुणवत्ता के रियल टाइम टाडा रखे जाएं और वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं।
-जहां हालात चिंता जनक हैं वहां रेड अलर्ट घोषित किया जाए।
-वायु प्रदूषण बढ़े तो उसके कारण देखकर वाहनों, प्लांट, उद्योगों बंद किया जाए।
-डीजल से चलने वाले वाटर पंप सेट को सोर ऊर्जा से चलाया जाए।
-ई-वाहनों की संख्या बढ़ाई जा। 
-कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए।
-धूल वाले इलाकों में पौधे लगाए जाएं।
-अक्षय ऊर्जा  को स्रोतों को बढ़ाया जाए।
-थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों पर कठोर उत्सर्जन मानकों को लागू कराया जाए।
Source:

No comments:

Post a Comment