वर्ष | स्थान | अध्यक्ष |
1985,1882 | बम्बई,इलाहाबाद | डव्लू.सी.बनर्जी |
1886 | कलकत्ता | दादाभाई नैरोजी |
1893 | लाहौर | दादाभाई नैरोजी |
1906 | कलकत्ता | दादाभाई नैरोजी |
1887 | मद्रास | बदरुद्दीन तैय्यब जी |
1888 | इलाहाबाद | जॉर्ज युले (प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष) |
1889 | बम्बई | सर विलियम बेडरबर्न |
1890 | कलकत्ता | सर फिरोजशाह मेहता |
1895,1902 | पूना,अहमदाबाद | सुरेन्द्रनाथ बनर्जी |
1905 | बनारस | गोपालकृष्ण गोखले |
1907,1908 | सूरत,मद्रास | रासबिहारी घोष |
1909 | लाहौर | एम.एम.मालवीय |
1916 | लखनऊ | ए.सी.मजुमदार |
1917 | कलकत्ता | एनी बेसेंट |
1919 | अमृतसर | मोतीलाल नेहरू |
1920 | कलकत्ता(विशेष अधिवेशन) | लाला लाजपत राय |
1921,1922 | अहमदाबाद,गया | सी.आर.दास |
1923 | दिल्ली(विशेष अधिवेशन) | अब्दुल कलाम आज़ाद(सबसे युवा अध्यक्ष) |
1924 | बेलगाँव | महात्मा गाँधी |
1925 | कानपुर | सरोजनी नायडू(प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष) |
1928 | कलकत्ता | मोतीलाल नेहरू |
1929 | लाहौर | जे.एल.नेहरू |
1931 | कराची(यहाँ मूल अधिकारों के प्रस्ताव और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम को पारित किया गया) | वल्लभभाई पटेल |
1932,1933 | दिल्ली,कलकत्ता | अधिवेशन प्रतिबंधित |
1934 | बम्बई | राजेंद्र प्रसाद |
1936 | लखनऊ | जे.एल.नेहरू |
1937 | फैजपुर | जे.एल.नेहरू(प्रथम बार गाँव में अधिवेशन) |
1938 | हरिपुरा | एस.सी.बोस(जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आयोजन समिति का गठन किया गया) |
1939 | त्रिपुरी | एस.सी.बोस को दोबारा चुना गया लेकिन गांधी जी के प्रदर्शन के कारण त्यागपत्र दे दिया(क्योकि गाँधी जी ने पट्टाभिसीतारमैया को समर्थन दिया था) उसके बाद राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष बनाया गया |
1940 | रामगढ़ | अब्दुल कलाम आजाद |
1946 | मेरठ | आचार्य जे.बी.कृपलानी |
1948 | जयपुर | डॉ. पट्टाभिसीतारमैया |
Jan 25, 2018
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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बहुत दिनों से इच्छा थी कि हिंदी माध्यम के छात्र मुझसे जुड़ें और अपनी-अपनी बातें रखें. इंग्लिश पोर्टल, इंग्लिश एजुकेशनल वेबसाइट ढेर सारे पड़े हैं मगर हिंदी माध्यम के छात्र जो सिविल सेवा/Civil Services Exam, SSC, Railway, Banking, Insurance आदि परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, वे इन सुविधाओं से अछूते रह जाते हैंअब तो परीक्षाओं में भी हिंदी माध्यम से परीक्षा देने का विकल्प है. परन्तु चूँकि अंग्रेजी माध्यम के परीक्षार्थी अधिक हैं इसलिए हिंदी के लिए समर्पित ऐसी कोई वेबसाइट नहीं बनी जहाँ हम अपना सुख-दुःख, परीक्षा की रणनीति एक दूसरे से साझा कर सकें.
तो आइये, इस अभियान को आगे बढ़ाइए. मेरा कार्य तो आपको केवल उत्साहित करने, जोश से भरने मात्र का है. पर आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा, ऐसी मुझे आशा है.
जय हिन्द!.

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