मेरे खुराफाती दिमाग में एक ख्याल आया क्यों ना आज पापा का पर्स चेक किया जाए। जिसे आज तक उन्होंने किसी को हाथ तक नहीं लगाने दिया था। पता नहीं कौन सा खजाना छुपा है इस पर्स में, जो किसी को हाथ नहीं लगाने देते थे। जब मैंने पापा का वह पुराना पर्स खोलकर देखा तो उसमें पैसे तो नहीं मिले। लेकिन पैसों की जगह पर एक डायरी रखी हुई थी।
तब मैंने सोचा, ओह्ह...! तो यहां खजाना छुपा रखा है। मैं समझ रहा था, कि यहां पापा ने लिखा होगा की किस से कितने पैसे लेने हैं, और किसको कितने पैसे दिए हैं। लेकिन मैं गलत था। जब मैंने उस छोटी सी डायरी का पहला पेज खोलकर देखा तो वहां पर जो लिखा था, वह थोड़ा सीरियस कर देने वाला था। डायरी में जो लिखा था, उसे पढ़ने के बाद मेरे चेहरे पर जो एक्सप्रेशन थे वह गायब हो चुके थे।
मुझे आज भी याद है। जब मैंने पहली बार कैमरे के लिए जिद की थी। जो मेरे पापा ने मुझे 2 हप्ते बाद मेरे बर्थडे पर ला कर दिया था। जिसे देख कर मैं बहुत खुश हुआ था, और मुझे खुश देखकर मुझसे कहीं ज्यादा अगर कोई खुश था। तो वह थे 'पापा'। अब मेरे चेहरे से गुस्सा एकदम गायब हो चुका था। जब मैंने आगे का पन्ना पलटा तो वहां पर कुछ wishes (इच्छाएं) लिखी हुई थी।
पहली जो विश थी उसमें जो लिखा हुआ था "अच्छे जूते पहनना"। यह बात मेरी कुछ समझ नहीं आई। तभी मेरा पांव अचानक सड़क पर भरे हुए पानी पर जा पड़ा और तभी मेरे पांव मैं कुछ गीलीपन होने का एहसास हुआ। जब मैंने जूता उतार कर देखा तो उसका तला टूटा हुआ था। यह देखकर मुझे डायरी में लिखी बात याद आ गई।
तभी मुझे मां पापा की कही बातें भी याद आ रही थी। कि कैसे माँ जब कहा करती थी पापा से - "अब तो जूते पुराने हो गए नए ले लीजिए"। तो पापा अक्सर यह कहकर टाल दिया करते थे-- "जूते अभी और चलेंगे अभी कुछ दिन पहले तो लिए थे"। मुझे आज समझ आ रहा था कि कितने दिन और चलेंगे। साथ ही साथ यह भी समझ आ रहा था, कि पापा पर्स को क्यों छुपा कर रखते थे।
तभी उस डायरी को पढ़ते हुए बस स्टैंड पर पड़ी बेंच पर आकर बैठ गया। अब उस डायरी का आखरी पन्ना बचा हुआ था। उस पन्ने को जब मैंने पलट कर देखा तो वहां कल की date लिखी हुई थी। तरीख के नीचे लिखा हुआ था 50 हजार रुपए बाइक के लिए बस इतना पढ़ा और दिमाग सन्न रह गया। अब मेरे मन में कोई शिकवा गिला नहीं बचा था। बस मेरी आंखों से आंसू चले जा रहे थे। मुझे आज तक नहीं पता तब मैं क्यों रोए जा रहा था।
अब मैं जल्दी से घर की तरफ भागा। लेकिन जूतों की वह कील पाँव में अब तक घाव बनाने में कामयाब हो चुकी थी। मैंने जूतों को रास्ते में ही निकाल कर फेंक दिया और भागते लड़खड़ाते हुए घर जा पहुंचा लेकिन पापा घर पर नहीं थे। मैं समझ गया वह कहां थे। मैं सीधा पास वाली बाइक एजेंसी की तरफ भागा। पता नहीं आज कहां से इतनी ताकत आ गई थी, कि मैं भागते हुए थक नहीं रहा था और वह भी बिना जूतों के नंगे पैर।
जैसे तैसे मैं बाइक एजेंसी पर पहुंचा, पापा वही थे। मैंने पापा को दौड़ कर गले लगा लिया। और मेरी आँखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। पापा को समझ नहीं पा रहे थे। आखिर हो क्या रहा है मैं क्यों रो रहा हूँ? मैंने पापा से कहा-- "पापा मुझे मोटरसाइकिल नहीं चाहिए। आप अपने लिए जूते ले लीजिए। अब आज से मैं जो भी करुंगा अपनी मेहनत से अपने बलबूते पर पढ़ कर करूंगा।
दोस्तो....! बस इतनी सी थी ये कहानी.........
More Word's - Heart Touching Story in Hindi
यह "Heart Touching Story" लिखते हुए आज मेरी भी आंखें नम हुई है। मैं आज आपसे कहना चाहूंगा ठीक ऐसे ही होते हैं, "हमारे पिता"। हम अक्सर देखते हैं कि हम अपनी मां से हर बात शेयर करते हैं, और मां भी इसके बदले में हमें बहुत प्यार देती है। लेकिन एक शख्स ऐसा भी होता है, जो हम्हे छुपकर प्यार करता है। वह होते है- "हमारे पिता"।यह परिवार में एक मात्र ऐसा व्यक्ति होता है।जो अपने बच्चों से उन्हें बिना जताए छिपकर प्यार करता है, खुद की इच्छाओं को मारकर बच्चों के लिए सपने देखता है। और उनकी खुशी में ही खुश हो जाता है। मुझे नहीं पता कि आप अपने पेरेंट्स की इज्जत करते हो या नहीं लेकिन अगर आप के पास पैरेंट्स हैं, तो आप बहुत खुश नसीब हो। क्योंकि इस दुनिया में बहुत से लोगों को तो पेरेंट्स का प्यार भी नसीब नहीं होता। अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि मां-बाप की भावनाओं का सम्मान करें।

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